मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर, पूरण करो आस॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पूर्ण करहु मम भारी॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्याप्त हो तुम कल्याणी॥
जग पालन तुम ही करनहारी। दुख दारिद्र्य मेटनहारी॥
भाग्य विधाता तुम हो जगत की। पूजा भक्ति से दो माँ धन गति॥
जो तुम्हें भक्ति से ध्यावे। सो नर धन सम्पद पाए॥
पद्मासन हो पद्मधारिणी। दाएं बाएं सेवित हारिणी॥
हाथ में कमल ललाट पर बिन्दी। जग माया तुम हो जग की वन्दी॥
दीपावली में पूजन होय। लक्ष्मी घर घर में प्रकट होय॥
श्रीयंत्र में निवास तुम्हारा। धन सम्पत्ति में नाम तुम्हारा॥
कमला नाम जगत में होत। श्री लक्ष्मी जस गावत लोग॥
चंचला हो पर स्थिर कर दो। भक्तन पर कृपा कर दो॥
शुक्रवार व्रत जो नर करता। लक्ष्मी कृपा उस पर बरता॥
कनकधारा स्तोत्र जो गावे। लक्ष्मी माँ को घर में बुलावे॥
विष्णुप्रिया हो तुम महारानी। तुम्हें भजे जो मनुज सयानी॥
सुख सम्पत्ति का भण्डार मिलावे। चरण शरण आए सुख पावे॥
दरिद्रता को दूर भगावो। भक्तन को धन-धान्य दिलावो॥
राखो सदा शरण में माते। पूरन करो सकल मनमाते॥
जो लक्ष्मी चालीसा पढ़े। उसके घर में लक्ष्मी बढे॥
विधिपूर्वक जो नित्य जपे। माँ लक्ष्मी का वरदान मिले॥
लक्ष्मी मात पुकारहूँ, करो कृपा भण्डार।
चरण शरण का दास हूँ, करो बेड़ा पार॥
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