ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
Oṃ bhūr bhuvaḥ svaḥ
tat savitur vareṇyaṃ
bhargo devasya dhīmahi
dhiyo yo naḥ pracodayāt
ॐ - परब्रह्म का प्रतीक, सर्वशक्तिमान ईश्वर।
भूः - भूलोक (पृथ्वी)।
भुवः - अन्तरिक्ष लोक।
स्वः - स्वर्गलोक।
तत् - वह (परम सत्ता)।
सवितुः - सविता (सूर्यदेव, दिव्य प्रकाश का स्रोत)।
वरेण्यम् - सबसे श्रेष्ठ, वरण करने योग्य।
भर्गः - तेज, दिव्य प्रकाश।
देवस्य - उस ईश्वर का।
धीमहि - हम ध्यान करते हैं।
धियः - हमारी बुद्धि को।
यः - जो।
नः - हमारी।
प्रचोदयात् - सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
We meditate upon the divine, resplendent light of that Supreme Being (Savitr), who is the creator of all three worlds — earth, mid-region and heaven. May He illuminate and guide our intellect on the path of righteousness.
गायत्री मंत्र ऋग्वेद (मण्डल ३, सूक्त ६२, मंत्र १०) से लिया गया है। यह सनातन धर्म का सर्वाधिक प्रसिद्ध और सर्वशक्तिमान मंत्र माना जाता है। इसे "वेदों की माँ" भी कहा जाता है।
महर्षि विश्वामित्र ने इस मंत्र की रचना की थी। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में गायत्री मंत्र का जाप करने से बुद्धि का विकास, पापों का नाश और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है — "छंदों में मैं गायत्री हूँ।" इससे स्पष्ट होता है कि इस मंत्र का स्थान सर्वोच्च है।
Swami Vivekananda said: "We meditate on the glory of that Being who has produced this universe; may He enlighten our minds." The Gayatri Mantra is from Rigveda (3.62.10) and is the most universally recited Vedic mantra, chanted at dawn and dusk across India.
विष्णु गायत्री:
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
शिव गायत्री:
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
गणेश गायत्री:
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥
दुर्गा गायत्री:
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारिकायै धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
लक्ष्मी गायत्री:
ॐ महादेव्यायच विद्महे विष्णुपत्न्यायच धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
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