॥ श्री राम जय राम जय जय राम ॥

॥ श्री बजरंग बाण ॥

 

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥


॥ चौपाई ॥

जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

जैसे कूदि सिन्धु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
बाग उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥

अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह सजीवन लखन जियाए। श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥

देव धर्म निष्ठा न हारो। जय जय जय हनुमान पुकारो॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारिचर॥

इन्हें मारु तोहि शपथ राम की। राखु नाथ मर्याद नाम की॥
जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ बिलम्ब न लावो॥

जाँय चढ़ो जय जय जय। जाँय चढ़ो जय जय जय॥
ओहि अहिल्या उद्धार किया रे। निसिचर जाय जाय जाय रे॥

बज्र देह दानव दलन। जय जय जय हनुमान।
ओहि त्रिभुवन के स्वामी हो। जय जय जय हनुमान॥


॥ दोहा ॥

यह बजरंग बाण जपे, निश दिन धर शुभ ध्यान।
तासु अमित महिमा बखानैं, सकल सिद्धि हनुमान॥


The Bajrang Baan is a very powerful hymn dedicated to Lord Hanuman. It is believed that whoever recites it with pure devotion is protected from all negative forces, evil spirits, black magic and enemies. The text invokes Lord Hanuman's power through the oath of Lord Ram and Mother Sita. It is recommended to recite this only with sincere faith and clean mind.

 

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